Category: GK in Hindi

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प्राचीन भारतीय इतिहास : 11 – जैन धर्म का उदय

प्राचीन भारतीय इतिहास : 11 – जैन धर्म का उदय जैन शब्द संस्कृत शब्द जिन से बना है, जिसका अर्थ है – विजेता। जो अपने मन, वाणी व शरीर पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है, उसे जिन कहा जाता है। जैन धर्म में वस्त्रहीन शरीर, शाकाहारी भोजन और निर्मल वाणी जैसे सिद्धांतों का पालन किया…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 10 – भारत में वर्ण व्यवस्था और इसका उद्भव

प्राचीन भारतीय इतिहास : 10 – भारत में वर्ण व्यवस्था और इसका उद्भव भारत में वर्ण व्यवस्था के अंतर्गत समाज को चार भागों में बाँटा गया है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। प्रारम्भ में वर्ण व्यवस्था कर्म-आधारित थी जो उत्तर वैदिक काल के बाद जन्म-आधारित हो गयी। ब्राह्मण– पुजारी, विद्वान, शिक्षक, कवि, लेखक आदि। क्षत्रिय–…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 9 – उत्तर वैदिक कालीन साहित्य

प्राचीन भारतीय इतिहास : 9 – उत्तर वैदिक कालीन साहित्य उत्तर वैदिक काल में अंतिम तीन वेद यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद की रचना की गयी। इसके अलावा उपनिषद, पुराण, अन्य ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक, वेदांग की भी रचना की गयी। सामवेद सामवेद में 1,875 ऋचाएं हैं, इसमें 75 सूक्तों को छोड़कर शेष ऋग्वेद से लिए गए हैं।…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 8 – उत्तर वैदिक काल- समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति और धर्म

प्राचीन भारतीय इतिहास : 8 – उत्तर वैदिक काल- समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति और धर्म उत्तर वैदिक काल में राजनीतिक स्थिति उत्तर वैदिक काल में राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन आये।उत्तर वैदिक काल में जनजातीय व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त होने लगी।इस दौरान कई क्षेत्रों में छोटे-छोटे राज्य अस्तित्व में आने लगे। जन का स्थान जनपद द्वारा लिया…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 7 – ऋग्वैदिक कालीन साहित्य

प्राचीन भारतीय इतिहास : 7 – ऋग्वैदिक कालीन साहित्य ऋग्वेद विश्व के इतिहास की सबसे पुरानी पुस्तक है। ऋग्वेद की रचना ऋग्वैदिक काल में हुई बाकी तीनों वेद यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद की रचना उत्तर वैदिक काल में हुई। वेदांग, पुराण, उप-पुराण, आरण्यक, उपनिषद, आदि की रचना भी उत्तर वैदिक काल में ही हुई। ऋग्वेद ऋग्वेद…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 6 – ऋग्वैदिक काल का रहन सहन और अर्थव्यवस्था

प्राचीन भारतीय इतिहास : 6 – ऋग्वैदिक काल का रहन सहन और अर्थव्यवस्था राजनीतिक स्थिति ऋग्वेदिक राजनितिक व्यवस्था काफी सरल थी, यह कबीलाई व्यवस्था थी। आर्य राज्यों की बजाय कबीलों में संगठित थे। इसमें बड़े राज्य का निर्माण दृष्टिगोचर नहीं होता, यह एक जनजातीय सैन्य लोकतंत्र था। इसकी शक्ति का मुख्य स्त्रोत कबीले की परिषद्…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 5 – सिंधु घाटी सभ्यता की जीवन शैली तथा रहन सहन

प्राचीन भारतीय इतिहास : 5 – सिंधु घाटी सभ्यता की जीवन शैली तथा रहन सहन नगर व्यवस्था सिन्धु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम नगर सभ्यताओं में से एक है। सिन्धु घाटी सभ्यता में नगरों का निर्माण काफी कुशल व सुनियोंजित तरीके से किया गया था। इसमें जल निकासी की उचित व्यवस्था थी और यह नगर…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 4 – सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल

प्राचीन भारतीय इतिहास : 4 – सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल हड़प्पा सिन्धु घाटी सभ्यता में हड़प्पा की खोज सबसे पहले की गयी थी, इस कारण इसे हड़प्पा संस्कृति भी कहा जाता है। वर्तमान में हड़प्पा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में साहिवाल के पश्चिम में 24 किलोमीटर दूर स्थित है। प्राचीन हड़प्पा का अनुमानित…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 3 – सिंधु घाटी सभ्यता

प्राचीन भारतीय इतिहास : 3 – सिंधु घाटी सभ्यता सिन्धु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है, इसका अनुमानित समय काल 2500 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व है। सिन्धु घाटी सभ्यता कांस्ययुगीन (ब्रोंज ऐज) थी।  इसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है। यह सभ्यता नगरीय थी। इस सभ्यता…
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प्राचीन भारतीय इतिहास : 2 – प्रागैतिहासिक भारत

प्राचीन भारतीय इतिहास : 2 – प्रागैतिहासिक भारत प्रागैतिहासिक मानव का समयकाल, मानव की उत्पत्ति से 3000 ईसा पूर्व माना जाता है। यह मानव का शुरूआती समयकाल था और उसकी जीवन शैली भी अधिक विकसित नहीं थी, इस काल के सम्बन्ध में अधिक लिखित साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। प्रागैतिहासिक काल का अध्ययन करने के लिए…
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